रविवार, 7 मार्च 2010

घोटाले का नया तरीका


एक दिन पहले बाबूलाल गौर ने उल्झावन में जा कर कुलांस नदी कि सफाई के नाम पर करोडो रूपए कि घोषणा कि और तर्क यह दिया गया कि तलाव में पानी कम पहुंच रहा है इस कारण नदी को साफ करना होगा गाँव कि भोली भाली जनता ने भी तालिया बजा कर इस बात का स्वागत किया पर इस देश कि गरीव जनता को कौन समझाए कि जिस पर वो तालिया ठोक रहें है वही उनको नुकसान देने आया है पहली बात तो यह कि नदी कि सफाई से तलाव के भरने का कोई सम्वन्ध नहीं है क्योकि पानी जितना बरसेगा उतना ही तो बहेगा अब सवाल यह है कि यदि बरसता भी है और रुक कर पानी जाता है तो इसमें तो किसानो का भला ही है क्योकि इससे उनके खेतो का जल स्तर बढ़ता है जोकि फसल के लिए लाभ दायक है अब किसान खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारेगा और यह सब हो रहा है कुछ चापलूस प्रकार के दलालों के कारण वो अपने थोड़े से फायदे के लिए लोगो को जो उनपर विस्वास करते है को धोखा देने में भी नही कतराते जरुरत है लोगो को अपना और अपने गाँव के हित के वारे में सोचने की कब तक अपना शोषण होने देंगे कभी तो आवाज उठानी होगी

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